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| Daughter in Village well |
बेटी बिना काई को जमानों,
इण बात ने पहचाणो
बेटी खेले जीण आंगणै,
बेटी खेले जीण आंगणै,
जठे आनंद सर्वगा रो आणो
अरे आतो चिड़कली,
अरे आतो चिड़कली,
आ तो दस दिन री मेहमान
समजे कोनी दुनिया,
समजे कोनी दुनिया,
क्यू जलम्या पेली पहुंचा दे श्मशान।।
पूत कपूत जलम जावे,
पूत कपूत जलम जावे,
पर बेटी कदी कपुति ने होय
जीण घर कदर नही बेटी की,
जीण घर कदर नही बेटी की,
घर नरक से भुंडो होए।
धोरां मंड्या पगलिया,
धोरां मंड्या पगलिया,
चिड़कली जद चालण लागी।
आँगन महकण लाग्यो,
आँगन महकण लाग्यो,
जद गोद में से उठ चालण लगी.
क्यों दुनिया कैवे तू पराई है,
क्यों दुनिया कैवे तू पराई है,
तू तो म्हारे मर्यादा रो चंदन है।
तू चिड़कली म्हारी,
तू चिड़कली म्हारी,
तू माँ के दिल री धड़कन है।
मायड़ जाण कळेजै री कोर,
मायड़ जाण कळेजै री कोर,
फ़ूल माथै पांख्यां धरी।
माथै कर-कर पलकां री छांय,
माथै कर-कर पलकां री छांय,
पाळ-पोस मोटी करी॥
राखी नैणां री पुतळी जाण,
राखी नैणां री पुतळी जाण,
मोतीडा़ सूं महंगी जाणि।
जद तू छोड़ बाबुल ने चाली,
जद तू छोड़ बाबुल ने चाली,
सूखे गयो समंदा रो पाणी।।
करती कळझळ हिवडै़ रा दो टूक,
करती कळझळ हिवडै़ रा दो टूक,
कूंकूं पगल्या आगै धरिया ।
कायर हिरणी-सी मुड़-मुड़ देख ,
कायर हिरणी-सी मुड़-मुड़ देख ,
आंख्यां माथै हाथ धरिया ।
मुखडो़ मुरझायो बिछडंतां आज,
मुखडो़ मुरझायो बिछडंतां आज,
रो-रो नैण राता करिया ।
थडै़ चढती पाछल फ़ोर,
थडै़ चढती पाछल फ़ोर,
सहेल्यां नै झालो दियो।
छळक्या नैण घूंघटियै री ओट,
छळक्या नैण घूंघटियै री ओट,
काळजो काढ लियो।
अमर आसीस है बाबुल री एक दिन दुनिया दुःख थारो जाणेली
स्वर्ग बन जावली दुनिया जद हर आँगण बेटियाँ पगलिया माण्डेली ।।
अमर आसीस है बाबुल री एक दिन दुनिया दुःख थारो जाणेली
स्वर्ग बन जावली दुनिया जद हर आँगण बेटियाँ पगलिया माण्डेली

3 टिप्पणियाँ
लाजवाब रचना
जवाब देंहटाएंAtisundar
जवाब देंहटाएंGood
जवाब देंहटाएंमैसेज करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।