मिश्री को बाग़ लगा दे - राजस्थानी लोकगीत

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मिश्री को बाग़ लगा दे - राजस्थानी लोकगीत

ओ ओ ओ  ........
मिश्री को 
मिश्री को बाग़ लगा दे रसिया
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
मिश्री को बाग़ लगा दे रसिया
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
खारी लागे रे म्हाने खारी लागे
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
मिश्री को बाग़ लगा दे
मिश्री को बाग़ लगा दे

ओ ओ ...
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
मिश्री को बाग़ लगा दे रसिया
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे


ओ जी ओ ओ जी ओ .....
रंग रंगीला म्हारा साहेब थे तो
थांकी सांवली सूरत मतवाली लागे
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
थांकी सांवली सूरत मतवाली लागे
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
मिश्री को बाग़ लगा दे रसिया
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे



ओ ओ ओ ओ ओ ओ आ आ आ आ .....
सामली पाड़ोसन तीखो सुरमो सारे
ठुमका करती छम छम चाले
बा तो फुटेड़ी सी म्हाने इक झारी लागे
उजड़ी सी म्हाने इक क्यारी लागे
बा तो फुटेड़ी सी म्हाने इक झारी लागे
उजड़ी सी म्हाने इक क्यारी लागे
मिश्री को बाग़ लगा दे रसिया
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे

ओ ओ ओ ओ ओ ओ .....
ओ जी ओ ओ जी ओ .....
थे भी तो बीने लुक छिप ताको
खिड़की खोलो झुक झुक ताको
म्हाने सामली पाड़ोसन कामणकारी लागे
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
म्हाने सामली पाड़ोसन कामणकारी लागे
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
मिश्री को बाग़ लगा दे रसिया
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे


ओ जी ओ ओ जी ओ .....
म्हे तो इब थाने लागूं हूँ पुराणी
इसी बातां मत कर सुण ले ऐ स्याणी
तू तो म्हाने ...
तू तो म्हाने रूप की धिराणी लागे
प्यारी प्यारी म्हारी घरआली लागे
तू तो म्हाने रूप की धिराणी लागे
प्यारी प्यारी म्हारी घरआली लागे
मिश्री को बाग़ लगास्या गोरिये,
नीम की निम्बोली थाने खारी लागे,
ओ ओ ...
नीम की निम्बोली थाने खारी लागे,

मिश्री को बाग़ लगा दे रसिया
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे
ओ ओ ...
नीम की निम्बोली म्हाने खारी लागे। 


लेख़क - निर्मल मिश्र 
गायिका - सीमा मिश्रा 

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